प्रदेश के अतिथि शिक्षकों को लेकर हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि उन्हें यथावत रखा जाए, उन्हें हटाया नहीं जाए। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश आरएस झा व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने 16 अतिथि शिक्षकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया है। मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता जबलपुर निवासी हेमंत तिवारी सहित अन्य की ओर से अधिवक्ता सिद्धार्थ गुलाटी, इन्द्रजीत यादव, तबरेज खान, नीरज सिंह, संजीव कुमार चंसोरिया, यूएस जायसवाल, हरीश शुक्ला, एस बेग, एसडी मिश्रा, वीपी कुशवाहा ने पक्ष रखा। जबकि राज्य की ओर से शासकीय अधिवक्ता भूपेश तिवारी खड़े हुए।
     याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि राज्य शासन ने नए सिरे से नियुक्ति प्रक्रिया को गति दे दी है। इसके तहत ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए जा रहे हैं। यदि इस प्रक्रिया को रोका नहीं गया तो पहले से कार्य कर रहे अतिथि शिक्षक बेरोजगार हो जाएंगे। हाईकोर्ट ने पूरे मामले पर गौर करने के बाद अपने आदेश में व्यवस्था दे दी कि बिना हाईकोर्ट की अनुमति के पहले से कार्यरत अतिथि शिक्षकों को हटाया नहीं जाएगा। नए अतिथि शिक्षक पूर्व में कार्यरत अतिथि शिक्षकों के विकल्प बतौर नियुक्त नहीं किए जा सकते। हाईकोर्ट के इस फैसले से प्रदेश भर में कार्यरत हजारों की संख्या में अतिथि शिक्षकों में खुशी की लहर दौड गई है।