एनजीओ संचालक की गुंडागर्दी, रिश्तेदार ने खाकी का रौब दिखाकर धमकाया
एससी/एसटी के युवाओ को प्रशिक्षण देने के नाम पर विभाग की मिलीभगत से पलीता
 
 राजगढ़ - अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के शिक्षित बेरोजगार उम्मीदवारों के उद्योगों/संस्थाओ में रोजगार प्राप्ति के लिए निशुल्क प्रशिक्षण आदिमजाति विभाग द्वारा मध्यप्रदेश रोजगार एवं प्रशिक्षण परिषद्  के द्वारा कराये जाते है वही जिला मुख्यालय पर स्किल रूट एजुकेशन काउंसलिंग इंडिया प्रायवेट लिमिटेड द्वारा विभाग के जिम्मेदारो की मिलीभगत से नियमो की अनदेखी कर बजट को पलीता लगाने के मामले को मीडिया द्वारा लगातार प्रमुखता से प्रकाशित किया गया, लेकिन जिम्मेदारो के कानो पर जू नहीं रेंगी वही ताजा मामला सामने आया है जिसमे छात्रवृत्ति मांगने पर एनजीओ संचालक आरती माझी और रिश्तेदार बताने वाले आरक्षक प्रेमचन्द्र माझी के गुस्से का सामना करना पड़ा और इस आरक्षक ने वर्दी को रौब दिखाते हुए अनुसूचित जाति/जनजाति छात्रावास में रहकर पढने वाले छात्रों को उठाने और सबक सिखाने की भी धमकी दी, और यह सब कैमरे में कैद भी हुआ! वही इस मामले में भीम सेना संगठन ने नाराजगी जताते हुए आरक्षक के खिलाफ हल्ला बोलने की बात कहते हुए कार्यवाई की मांग की है!
 
वर्दी का रौब बच्चों पर, दी धमकी
 
इस पूरे मामले का विडियो भी रिकार्ड हुआ जिसमे संचालक आरती माझी और कथित रिश्तेदार आरक्षक प्रेमचंद माझी छात्र के परीक्षा के बारे में फोन पर पूछने पर नाराजगी जताते हुए नजर आये और वे यही नहीं रुके, वर्दी का रौेब देखिये यह तक कह दिया कि तमीज सीखो, मेरे पास सेंटर लगता है तमीज सिखाने का, वो तो तुम स्टूडेंट हो, जानते नहीं हो मुझे, पूछ लेना माझी हेडसाहब के बारे में, बाहर मिलोगे तो सिखाऊंगा, और नहीं तो चलो बाहर, जानते नहीं हो मुझे!
 
जिम्मेदारी से बच रहे अधिकारी-
 
इस प्रशिक्षण के तहत बेरोजगारों को प्रशिक्षित किया जाता है तांकि रोजगार पा सके लेकिन खानापूर्ति करते हुए यहाँ छात्रावास के पढने वाले बच्चों के नाम दर्ज करते हुए योजना और बजट को चुना लगाया जा रहा है, तमाम नियमो की अनदेखी करते हुए विभाग द्वारा दिखावे के लिए दो बार निरिक्षण किये गए लेकिन दर्ज 60 बच्चो में कभी 6 तो कभी 12 बच्चे ही मिले और सभी बच्चों के नाम पर भुगतान लिया गया लेकिन बच्चे छात्रवृत्ति के लिए भटक रहे है!
 
नियमो को किया दरकिनार-
 
उक्त संस्था में बायोमेट्रिक मशीन द्वारा उपस्थिति लिए जाने का नियम है, और सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखने के भी आदेश है तांकि प्रशिक्षण नियम अनुसार हो सके लेकिन बायोमेट्रिक मशीन से उपस्थिति नही ली जा रही वही कैमरों के फुटेज पेनड्राईव् में कलेक्ट करने के भी आदेश है लेकिन प्रपत्र में औपचारिक जानकारी भरते हुए जिम्मेदारी से इतिश्री की क्योंकि छात्रों की सूची और वास्तविक संख्या सामने आ सके इस और कोई ध्यान नहीं दिया गया,और उनके नाम पर मिलने वाले बजट को पलीता लगाया जाने का अभयदान विभाग देता नजर आ रहा है, जिससे उनकी कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान खड़े होते है! विभाग जहां प्रपत्र में 4 सीसीटीवी कैमरे चालू होना बता रहा है तो उन्हें देखना और कलेक्ट करना क्यों जरुरी नहीं समझा गया! वही कलेक्टर इस मामले में फुटेज कलेक्ट करवाने और इस मामले की जाँच करवाने की बात कहते नजर आये थे लेकिन कोई कार्यवाई नहीं की  गई जिससे इस एनजीओ संचालक के हौसले बुलंद होते जा रहे है